जब से महान भारत देश का अविभाज्य राज्य जम्मू कश्मीर धाराओं की बेड़ियों से आज़ाद हुआ है तब से पडोशी मुल्क ने गांधी के नाम पर UN जैसे वैश्विक मंच से अपनी वैचारिक हिंसा फैलाना शुरू कर दिया है..
जब से इमरान खान ने UN में मिले अपने बोलने के अवसर का दुरुपयोग किया और जिसमे उसने बापू के भारत का बार बार उल्लेख किया और उसके बाद यहां के कुछ पत्रकार ने गोडसे पे हमला किया और कुछ नेताओं ने बापू के पुतले के सामने आंसू बहाए ये सब आपस मे जुड़ती कड़ियां है..
क्यो आपको इमरान के भाषण के बाद ही गोडसे पर हमला करना था? क्यो आपको इमरान खान के बताए उचित समय पर ही बापू के धर्मनिरपेक्षता का गुणगान गाना था?
धर्मनिरपेक्षता..... भारत तो तब भी धर्मनिरपेक्ष था जब कश्मीर में हिंदुओं का लहू बहा, भारत तो तब भी धर्मनिरपेक्ष था जब गोधरा में ट्रेन जला कर 59 हिन्दुओ को जिंदा जला दिया, भारत तो तब भी धर्मनिरपेक्ष ही था जब जगह जगह बम ब्लास्ट हुए, जब कारगिल हुआ जब संसद पे हमला हुआ जब अक्षरधाम मंदिर पे हमला हुआ भारत तब भी धर्मनिरपेक्ष ही था.. क्या ये धर्मनिरपेक्षता पाकिस्तान को रोक पायी? क्या ये धर्मनिरपेक्षता कट्टर इस्लामिक विचारधारा को रोक पायी? जिस देश का नाम ही इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान हो उस देश के वज़ीर को या उसके इशारों पे कठपुतली बन के बोलते यहां के कुछ पत्रकारों को धर्मनिरपेक्षता पे बोलना शोभा नही देता है..
ये कुछ पत्रकार आपको गोडसे में उलझा के धर्मनिरपेक्षता की गहरी नींद में सुलाने की भरपूर कोशिश करेंगे, जब कि पाकिस्तान का संविधान किसी गैर मुस्लिम को हक़ नही देता के वहा का वजीरेआजम बने पर भारत का संविधान किसी को धर्म के नाम पे नही रोकता, इससे बड़ी धर्मनिरपेक्षता और क्या देशवासी निभाएंगे, भारत का नाम भी तो हिन्दू रिपब्लिकन ऑफ भारत नही है, अब और कौन सी बापू की धर्मनिरपेक्षता निभानी बाकी है जो आप कुछ पत्रकार लोग गोडसे के "जी" से डर जाते हौ, पिस्तौल की नीलामी से डर जाते हो..
ये कुछ लोग जो गोडसे "जी" से कांप जाते है, पर इनको शर्म नही है ओसामा "जी" और हाफिज सईद "जी" वालो की पीठ थपथपाने में, इनको ये तक शर्म नही के अपनी सस्ती चेनलो के सस्ते शो में इमरान से पूछे के आपने UN में अपने भाषण में गोधरा की जंगलियात के बारे में क्यो न बोला, क्यो कश्मीरी हिन्दुओ के कत्लेआम पर एक शब्द न बोले, इनको इमरान खान को पूछना चाहिए कि क्यो पाकिस्तान इस्लामिक मुल्क रहे और भारत बापू की यादों में युगों युगों तक डूबा रहे, 1947 से ले कर 2014 तक बापू ही तो रहा भारत तब भी कोनसा आपने भारत के वीर जवानों का लहू बहाना रोका था, आज एक सशक्त सरकार के आते ही आपको बापू का भारत याद आ रहा है, बापू के भारत का मतलब क्या है? चुपचाप गालों पे थप्पड़ खाया करे यही न, 2014 तक यही तो करता था भारत, पड़ोसी मुल्क संसद तक आ के थप्पड़ मार के चला गया था हम तो तब भी बापू ही बने रहे थे, अब जरा सी गोडसे ने आवाज़ लगाई है तो आपको पसीने छूट रहे है..
ये बापू-गोडसे की लड़ाई थी ही कहा? किसी गलतफहमी में मत रहो, इसको तो जबरन उस दिशा में मोड़ा जा रहा है, हकीकत तो ये है कि ये लड़ाई उस बात की है के कश्मीर मुद्दे पर किस देश ने धर्म को हथियार बना कर उसके जैसे समान धर्म वाले मुल्कों को एकसाथ मिल कर लड़ने के लिए बुलाया, किसने बुलाया? क्या भारत ने बुलाया 57 इस्लामिक देशों को? या पाकिस्तान ने? जिस देश के कायदे आज़म ने सवा अरब मुस्लिम को जिहाद के लिए आवाज़ लगाई हो वो हमें बापू के भारत पर ज्ञान देगा? और किसी एजेंडे तहत कुछ पत्रकार हमे कहेंगे कि "सावधान रहिए, ये हो क्या रहा है इस देश मे" .. बापू की असली शिक्षा की जरूरत किस को है? और यहां के कुछ मूर्ख पत्रकार किस को ज्ञान बाट रहे है धर्मनिरपेक्षता का..?
गोडसे का मतलब ये नही है कि कोई हदीस न आये तो सर में गोली मारो, कोई आयात न आये तो गला काटो, गोडसे का अर्थ ये है कि कोई आपके एक गाल पे तमाचा मारे तो बापू का मान रख के दूसरा आगे कर दो, और दूसरे पे भी तमाचा मार दे तो फिर बापू को भूल के गोडसे का मान रख दो.. समझे पत्रकार बाबू..
ये कुछ पत्रकार समुदाय अपनी मर्जी से जब चाहे तब गोडसे पे हमला करेंगे, पर अगर आपने वीर सावरकर पे बोलना शुरू किया तो आपको रोजगार मंहगाई पे ले जाएंगे, आपने श्यामा प्रसाद पे कुछ अच्छा बोला तो आपको सरकार के जुमलों की याद दिलाएंगे, जब कि ये समुदाय दसको से नेहरू नाम के कुवें से बाहर नही निकल पाया, देश की जनता बहुत अच्छे से जान चुकी है पत्रकार साब के बापू महान थे पर उनकी महानता की कहा सीमा पूरी होती है और देश की सरहदों की सुरक्षा की गोडसे सीमा कहा से शुरू होती है, तो आप अपना अमूल्य ज्ञान पड़ोसी मुल्क के प्रधानमंत्री को दे दीजिएगा..
क्या ये कुछ पत्रकार 57 इस्लामिक देश को धर्मनिरपेक्षता सिखाएंगे? 57 छोड़ो, क्या पाकिस्तान को सही बापू की दिशा दिखाएंगे? क्या पाकिस्तान को धर्मनिरपेक्ष देश पहले खुद होना चाहिए बाद में UN में बापू पर कुछ बोलने की हैसियत रखनी चाहिए इतना भी अपने टोक शो में बोल पाएंगे? देश की जनता तो सब जानती है, कहा बापू की सीमा रेखा है और कहा से गोडसे की शुरू होती है जनता अब समझ चुकी है पत्रकार बाबू, सोये तो आप लोग हो, आपकी मजबूरियां है, जनता की नही, बाकी तो अपने टोक शो में RSS गोडसे कट्टर हिन्दुत्वे भगवा आतंक वगेरा वगेरा बोल के अपनी प्रिंट को पाकिस्तानी मीडिया में चलाने देना और उससे पापी पेट भरना तो आपका चलता रहेगा, क्यो की उसकी भी तो खास वजह है कि आप आज भी बापू के ही भारत मे हो..
अंत मे इतना कहना चाहूंगा फिर से, सावधान रहिए, पड़ोसी मुल्क का वज़ीरे आज़म जिसने मुज़फराबाद में ग़ज़वा ए हिन्द का एलान किया हो वो UN में बापू के भारत की दुहाई दे और यहां के कुछ पत्रकार आपको गोडसे में उलझाए तो यकीनन आपको सतर्क रहना है..
जय हिंद🚩
भारत माता की जय🚩

जय हिंद
ReplyDeleteजय हिंद
ReplyDeleteJai Hind
ReplyDeleteबहुत ही शानदार लेख राहुल भाई 🙏
ReplyDeleteधन्यवाद 🙏
ReplyDeleteRagul ji, first congrats, bahut acha likha. Ek ek shabd sache hai. Second likhte rahiye. All the best
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